Religious

जानिए रात में ही क्यों मनाई जाती हैं नवरात्रि?

हर साल भारत में करोड़ों लोग नवरात्रि का पर्व धूम धाम से मनाते हैं. लेकिन क्या कभी आपके मन में यह सवाल आया हैं कि नवरात्रि के इस त्यौहार को रात में ही क्यों मनाया जाता हैं? चलिए इस बात का गहराई से पता लगाते हैं.

‘नवरात्र’ शब्द को ध्यान से देखने पर आप पाओगे कि इसका एक अर्थ नव अहोरात्रों यानी की नौ विशेष रात्रियाँ भी होता हैं. यहाँ रात्री शब्द को सिद्धि का प्रतिक माना गया हैं. रात के समय शक्ति ने नवरूपों की उपासना की जाती हैं. इसलिए हम इसे नवरात्र कहते हैं ना कि नवदिन.

हमारे ऋषि मुनियों ने भी रात को दिन के मुकाबले ज्यादा लाभकारी बताया हैं. यही कारण हैं कि नवरात्रि के अलावा दीपावली, होलिका, शिवरात्रि, जन्माष्टमी जैसे त्यौहार भी रात को ही मनाए जाते हैं.

रात में नवरात्र मनाने का वैज्ञानिक कारण

वैदिक कारणों के अलावा कुछ वौज्ञानिक कारण भी हैं जो रात को त्यौहार मनाने पर जोर देते हैं. दिन की बजाए रात में माहोल शांत रहता हैं और कई सारे अवरोध भी ख़त्म हो जाते हैं. इसलिए जब आप रात को भगवान की उपासना करते हो तो आप ज्यादा एकाग्र होते हो और आपकी आवाज़ भगवान तक पहुच पाती हैं.

एक वैज्ञानिक मत यह भी हैं कि दिन में सूरज से निकली किरण जिस तरह रेडियो तरंगो को रोकती हैं ठीक वैसे ही मंत्रो के लिए निकली विचार तरंग में भी यह बाधा उत्पन्न करती हैं. साथ ही जब रात में मंदिर के घंटे और शंख को बजाय जाता हैं तो इस से निकली ध्वनि तरंगे दूर दूर तक जाती हैं रोग कीटाणुओं का नाश कर देती हैं. यही कारण हैं कि नवरात्र सहित अधिकतर हिन्दू त्यौहारों को रात में मनाया जाता हैं.

42.857142857143