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स्वतंत्र विचार: कौन हैं असली देशभक्त?

दोस्तों आजकल देशभक्ति के नाम पर भारत में बहुत रायता फैलाया जा रहा हैं. सोशल मीडिया, राजीनीति और दिखावे के चलते हर किसी ने देशभक्ति की अपनी ही एक परिभाषा बना ली हैं. आप के कौन से कृत्या से कब लोग आपको देशभक्त बना दे या फिर आप के किसी बयान की वजह से कब आपके ऊपर देश द्रोही का ठप्पा लगा दे कुछ कहा नहीं जा सकता हैं. चलिए इस देश भक्ति को एक उदहारण के माध्यम से समझते हैं.

26 जनवरी और 15 अगस्त के आते ही पुरे देश में जैसे देशभक्ति की लहर सी दौड़ जाती हैं. गाड़ियों, दुकानों, मकानों पर तिरंगे लग जाते हैं, जिस गली से गुजरते हैं वहां देशभक्ति के गाने सुनाई देते हैं, लोग अपनी देशभक्ति को दिखाने के लिए तिरंगे के रंग के साफे, कपड़ें पहनते हैं. कई लोग तो अपने शारीर पर तिरंगे का टेटू भी बनवा लेते हैं.

स्कूल, ऑफिस में तिरंगा लहरा कर राष्ट्रगान गाया जाता हैं. टीवी ऑन करते ही देशभक्ति फिल्मों और गानों की बाढ़ सी आ जाती हैं. नेता, अभिनेता, आम आदमी हर कोई ‘प्राउड टू बी इंडियन’ की स्पीच देता हैं या सोशल मीडिया पर अपना स्टेटस अपडेट करता हैं. कुल मिला कर देश के कौने कौने में देशभक्ति की खुशबु महकने लगती हैं. लेकिन ये खुशबु 26 जनवरी / 15 अगस्त की सुबह जितनी तेज होती हैं रात होते होते उतनी ही फीकी पड़ने लगती हैं.

फिर आती हैं 27 जनवरी / 16 अगस्त. इस दिन देश भक्ति की ये खुशबु पूरी तरह से गायब हो जाती हैं. ना सड़कों पर तिरंगे लहराते दिखते हैं ना ही सोशल मीडिया पर ‘प्राउड टू बी इंडियन’ के स्टेटस. अब आप किसी गली से गुजरते हो तो वहां देशभक्ति के गाने नहीं बल्कि कोई फ़िल्मी गाने चल रहे होते हैं. टीवी पर भी यही हाल होता हैं. यह सिलसिला तब तक यूं ही चलता रहता हैं जब तक कि अगली 26 जनवरी / 15 अगस्त नहीं आजाता. और फिर 27 जनवरी / 16 अगस्त से यही सिलसिला फिर से चल उठता हैं.

तो अब सवाल ये उठता हैं कि असली देश भक्त कौन हैं? वो जो साल में 2 दिन (26 जनवरी और 15 अगस्त) को अपनी देशभक्ति का नगाड़ा पिट फिर से अपनी रोज मर्रा की ज़िंदगी में व्यस्त हो जाते हैं या फिर वो जिसे अपनी देशभक्ति दिखाने के लिए किसी विशेष दिन की जरूरत नहीं पड़ती बस एक मौके की तलाश होती हैं.

उदाहरण के लिए देश का हर वो सख्श असली देशभक्त हैं जो:

बुराई के खिलाफ आवाज उठता हैं, किसी गरीब के ऊपर अत्याचार होने पर अपनी आवाज बुलंद करता हैं, किसी महिला की इज्ज़त पर आंच आने पर एक्शन लेता हैं, मुसीबत में पड़े इंसान और जानवर दोनों की वक़्त रहते मदद करता हैं, देश की साफ़ सफाई और अर्थव्यवस्था बनाए रखने में हर रोज उसी सिद्दत से अपना योगदान देता हैं और जब धर्म के नाम पे देश को बांटा जाता हैं तो उसे जोड़ने की कोशिश करता हैं.

याद रहे दोस्तों सीमा पर तैनात सैनिक अपनी जान पर खेल हर रोज अपनी देशभक्ति का परिचय दे रहे हैं इसके बदले में आप इतना तो कर ही सकते हैं कि जिस देश की वो रक्षा कर रहे हैं उसके आतंरिक ढाँचे को आप मजबूत बनाए. इसके लिए आपको सीमा पार जाकर लड़ने की जरूरत नहीं हैं बस अपने आस पास हो रही गलत चीजों को सुधारने की जरूरत हैं.

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