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गुस्से पर काबू – प्रेरणादायक कहानी

एक बार एक 7 साल का बच्चा था जो बहुत गुस्सा करता था. एक दिन उसके पापा ने बच्चे को किलों से भरी एक थैली दी और कहा “बेटा! अब से जब भी तुम्हे गुस्सा आए तो तुम इस थैली से एक किल निकालना और हथोड़े से इसे घर के पिछले दरवाजे में ठोक देना.”

पहले दिन बच्चे को दिन भर में 37 बार गुस्सा आया तो उसने दरवाजे में 37 कीलें ठोक दी. जैसे जैसे वक़्त बीतता गया बच्चा अपने गुस्से पर काबू करना सीखता गया और दरवाजे पर रोजाना ठुकने वाली किले भी कम होती चली गई.

आखिरकार वह दिन आ गया जब बच्चे ने दरवाजे पर एक भी कील नहीं ठोकी यानी उसने अब गुस्से पर काबू करना सिख लिया था. अब हर दिन वह अपने गुस्से को कंट्रोल में रख रहा था. अंत में उसने इस खुशखबरी को अपने पापा को सुनना चाहा.

बच्चे के पापा ने उसे साबसी दी और कहा कि अब रोजाना एक एक किल इस दरवाजे से निकालों. बच्चा पापा की बात समझ नहीं पाया लेकिन उसने इसका पालन करने का निर्णय लिया. अब कुछ दिनों बाद बच्चे ने दरवाजे से सारी कीलें निकाल दी थी. जब उसने यह बात अपने पापा को बताई तो पापा उसका हाथ पकड़ उसे दरवाजे के पास ले गए और बोले

“तुमने काम तो अच्छा किया हैं बेटा, लेकिन ये देखो दरवाजे में कितने छेद हैं. यह छेद दरवाजे में हमेशा रहेंगे. इसी प्रकार जब तुम गुस्से में आकर किसी को कुछ बुरा भला कह देते हो तो उसके जख्म हमेशा रहते हैं. फिर बाद में लाख सॉरी बोलने से भी जख्म भरते नहीं हैं. मान लो यदि तुम किसी व्यक्ति को चाकू मार दो और फिर सॉरी बोल दो तो चाकू से बना घाव कभी ठीक नहीं होगा, वो हमेशा ऐसा ही बना रहेगा”

कहानी की शिक्षा: गुस्से में आकर किसी को भी कुछ ऐसा बुरा भला मत कहो, जिसकी वजह से तुम्हे बाद में पछतावा हो. बेहतर होगा कि आप आज से ही अपने गुस्से पर काबू करना सिख ले.

 

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