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तितली का संघर्ष – प्रेरणादायक कहानी

एक बार एक आदमी गार्डन में टहल रहा था. गार्डन में काफी हरियाली थी और रंग बिरंगे फूल भी थे. इन फूलों पर कई तितलियाँ मंडरा रही थी. तभी आदमी की नज़र तितली के कोकून (कोष) पर पड़ी. इस कोकून में एक छोटा सा छेद था जिसके अन्दर से यह तितली बाहर निकलने की कोशिश कर रही थी.

आदमी इस तितली के पास बैठ गया और कोकून से बाहर निकलने के उसके संघर्ष को देखने लगा. कई घंटो की मेहनत के बाद भी तितली उस कोकून से बाहर नहीं निकल पाई और अंत में उसने कोशिश करना छोड़ दिया. ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो तितली उस कोकून के अन्दर फंस गई हैं.

आदमी से यह देखा नहीं गया और उसने तितली की मदद करने की सोची. उसने एक कैंची ली और उस तितली के आस पास के कोकून को काट दिया. ऐसा होने से तितली कोकून से आसानी से बाहर आ गई. हालाँकि उसका शरीर फुला हुआ था और उसके पंख छोटे और अविकसित थे.

तितली अपने फुले शरीर और छोटे पंख के कारण उड़ नहीं पाई और वहीँ जमीन पर रेंगती रही. आदमी ने तितली की मदद उस पर दया कर की थी ताकि उसका संघर्ष कम हो जाए. लेकिन आदमी यह नहीं समझ सका कि तितली से संघर्ष करवाना भगवान का ही एक तरीका था ताकि उसके शरीर का फ्लूइड पंखो तक पहुच जाए. इस तरह कुछ दिनों तक संघर्ष करने के बाद उसके पंख उड़ सकने के काबिल बन पाते.

कहानी की शिक्षा: हमारे जीवन का संघर्ष ही हमें ताकतवर बनाता हैं. बिना किसी संघर्ष के हम ताकतवर नहीं बन सकते हैं. लाइफ में मिलने वाली चुनौतियाँ हमें बहुत कुछ सिखाती हैं.

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