Religious

जैसी करनी वैसी भरनी – धार्मिक कहानी

एक बार भगवान श्री कृष्ण और अर्जुन अपनी नगरी में टहलने निकले. रास्ते में उन्हें भीख मांगता एक गरीब साधू दिखाई दिया. अर्जुन को साधू की ये हालत देख तरस आ गया और उसने साधू को सोने के सिक्कों से भरी एक पोटली दे दी. साधू बहुत खुश हुआ और अर्जुन को धन्यवाद कह घर की ओर निकल पड़ा.

रास्ते में साधू को एक गरीब व्यक्ति दिखाई दिया जिसे मदद की जरूरत थी. साधू के पास सोने के सिक्कों की पूरी पोटली होने के बाद भी उसने उस गरीब की मदद नहीं की ओर उसे नज़रअंदाज़ कर आगे बढ़ गया. तभी रास्ते में एक चोर साधू से टकराया और उसकी सोने की पोटली ले भागा.

निराश साधू अगले दिन फिर सड़क पर भीख मांगने लगा. तभी कृष्ण और अर्जुन वहां से निकले. साधू को फिर इस हालत में देख अर्जुन को आश्चर्य हुआ. जब उसने साधू से दोबारा भीख मांगने का कारण पूछा तो साधू ने चोरी वाली बात बताई. अर्जुन को साधू पर दया आई और उसने इस बार इसे हीरों से भरी एक पोटली दे दी. साधू बहुत खुश हुआ. उसने अर्जुन को धन्यवाद कहा और घर की ओर चल पड़ा.

इस बार फिर साधू को रास्ते में एक गारिब जरूरतमंद व्यक्ति दिखा. साधू ने उसकी और ध्यान नहीं दिया और सही सलामत घर पहुँच गया. साधू थक चूका था इसलिए पोटली में से हीरे निकाल उसने पानी के एक घड़े में रख दिए और सोने चले गया.

कुछ देर बाद साधू की बीवी घर आई और वो हीरो वाला घड़ा लेकर पानी भरने चली गई. साधू की बीवी को घड़े में पड़े हीरे नज़र नहीं आए और जब उसने बहती नदी से पानी भरा तो घड़े में मौजूद हीरे पानी में बह गए.

जब साधू उठा तो उसने अपनी बीवी से घड़े में रखे हीरे के बारे में पूछा. उसकी बीवी ने कहा कि उसने घड़े के अन्दर रखे हीरो को नहीं देखा था. शयद पानी भरते समय वो नदी में गिर गए होंगे. साधू को अपनी फूटी किस्मत पर विशवास नहीं हुआ और वो अगले दिन फिर से भीख मांगने चला गया.

नगरी में टहल रहे कृष्ण अर्जुन की नज़र फिर उस साधू पर गई. पूछताछ करने पर उन्हें सारी घटना के बारे में पता चला. अर्जुन साधू के प्रति सहानुभुति जता सोचने लगा कि क्या ये साधू जीवन में कभी खुश भी रह पाएगा? भगवान कृष्ण ने परिस्थितियों को भाप लिया और साधू को अपने पास से एक साधारण सिक्का निकाल कर दे दिया. साधू उदास मन के साथ वहां से चला गया. अर्जुन ने जब कृष्णा से पूछा कि इतने से पैसो में उसका क्या होगा तो कृष्ण ने कहा “जाओ उस साधू का पीछा कर खुद ही देख लो.” कृष्ण की बात मान अर्जुन साधू का पीछा करने लगा.

रास्ते में साधू कृष्ण से मिले उस साधारण सिक्के के बार में सोचता हुआ जा रहा था “कृष्णा ने मुझे इतनी छोटी रकम क्यों दी? इस से तो मैं एक वक़्त का खाना भी नहीं खरीद सकता.” तभी उसकी नज़र एक मछवारे पर पड़ी जो अपने जाल से तड़पती हुई मछली निकाल रहा था. साधू को मछली पर दया आ गई और उसने उस एक सिक्के से मछली को खरीद कर आज़ाद कर लिया.

साधू ने जैसे ही खरीदी मछली को पानी से भरे पात्र में डाला मछली ने अपने पेट से एक हिरा बाहर निकाल दिया. साधू यह देख खुश हुआ. आगे रास्ते में साधू को वही चोर मिल गया जिसने उस से सोने की पोटली चुराई थी. चोर साधू को देख घबरा गया और माफ़ी मांग उसकी सोने की पोटली लौटा दी. साधू को अपनी किस्मत पर यकीन नहीं हुआ और वो ख़ुशी ख़ुशी घर लौट गया.

अर्जुन ने यह नज़ारा देख कहा “हे कृष्ण भगवान! मैं आपके खेल को समझ गया.”

कहानी की शिक्षा: जैसी करनी, वैसी भरनी. यदि आप अच्छे कर्म करोगे तो आपके साथ भी अच्छा होगा.

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