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हार ना मानने वाला मेंढक – प्रेरणादायक कहानी

एक बार एक मेंढक एक किसान के घर के पास कूदता फांदता टहल रहा था. उस किसान के यहाँ एक भैसों का तबेला भी था. मेंढक जिज्ञासु प्रवत्ति का था इसलिए उसने सोचा क्यों ना इस तबेले का मुआयना किया जाए. वह कूदता फांदता तबेले के अन्दर घुस गया. तभी मेंढक को एक चमकदार बाल्टी दिखाई दी. मेंढक ने जानना चाहा कि ये चमकदार चीज क्या हैं.

मेंढक जैसे ही छलांग लगा कर बाल्टी के ऊपर गया वह उस बाल्टी के अन्दर गिर गया. यह बाल्टी दूध से आधी भरी थी. मेंढक ने अपने पिछले पैरो को जमीन पर रख ऊपर छलांग लगाने की कोशिश की. लेकिन उसके पैर दूध की वजह से बाल्टी के तले तक पहुच ही नहीं पाए.

मेंढक ने निर्णय लिया कि चाहे कुछ भी हो जाए मैं इस बाल्टी से बाहर निकल कर ही दम लूँगा. उसने बार बार अपने पैरो को पीछे पटक कर बाहर निकलने की कोशिश जारी रखी. मेंढक के पैर पटकने से दूध गोल गोल घूम और हिलने लगा. कुछ घंटो बाद उस दूध का मक्खन बन गया. मेंढक इस मक्खन के ढेर पर चढ़ कर बाल्टी से बाहर निकल आया.

कहानी की शिक्षा: कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती. इसलिए हमेशा कोशिश करते रहो. 

 

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