Religious

दीवापली पूजा विधि: ऐसे करे लक्ष्मी-गणेश-सरस्वती पूजन

दीवापली वाला दिन हर किसी के लिए ख़ास होता हैं. इस दिन भगवान लक्ष्मी, गणेश एवं सरस्वती की पूजा का विशेष महत्त्व होता हैं. इन तीनो देवी देवताओं को प्रसन्न करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता हैं. इसलिए आपको इस दिन पुरे विधि विधान से इन तीनो भगवान की पूजा अर्चना करनी चाहिए. तो चलिए जाने दिवाली पूजा की विधि…

दीवापली पूजन में लगने वाली सामग्री:

लक्ष्मी व गणेश एवं सरस्वती का चित्र या प्रतिमा, चांदी का सिक्का, कलश, शंख, गंगाजल, गुड़, धनिया, फल, फूल, जौ, गेहूँ, दूर्वा, चंदन, सिंदूर, घृत, पंचामृत, दूध, मेवे, खील, बताशे,  कुमकुम, चावल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, धूप, कपूर, अगरबत्तियां, दीपक, रुई, कलावा (मौलि), नारियल, शहद, दही, श्वेत वस्त्र, इत्र, चौकी,  कमल गट्टे की माला,   आसन, थाली,  मिष्ठान्न, 11 दीपक.

दीपावली पूजा की विधि:

सबसे पहले एक लकड़ी के पाठ पर या जमीन पर सफ़ेद वस्त्र बिछा कर गणेश, सरस्वती और लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करे. अपने ताम्बे के लौटे में शुद्ध जल ले और उसका छिड़काव सभी भगवानो की मूर्ति और प्रतिमाओं पर करे. इसके बाद पूजा स्थल, घर के अन्य कोनो और स्वयं पर भी इस जल का छिडकाव करे. जल छिडकाव के दौरान स्थल को पवित्र करने के लिए इस मंत्र का उच्चारण करे
ॐ अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोपि वा।
य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स: वाह्याभंतर: शुचि:।।
अब जमीन पर आसन बिछा कर उस पर भी जल छिड़के और जमीन को पवित्र करने के लिए ये मंत्र बोले…
पृथ्विति मंत्रस्य मेरुपृष्ठः ग ऋषिः सुतलं छन्दः कूर्मोदेवता आसने विनियोगः॥
 ॐ पृथ्वी त्वया धृता लोका देवि त्वं विष्णुना धृता।
त्वं च धारय मां देवि पवित्रं कुरु चासनम्‌॥
पृथिव्यै नमः आधारशक्तये नमः
अब हाथ में अक्षत (चावल), पुष्प, जल, और चांदी का सिक्का लेकर आखें बंद कर भगवान का ध्यान करते हुए संकल्प ले कि मैं अमुक व्यक्ति अमुक स्थान व समय पर अमुक देवी-देवता की पूजा करने जा रहा हूं, जिससे मुझे शास्त्रोक्त फल प्राप्त हों.
अब आपको पुनः हाथ में जल, पुष्प और अक्षत लेकर इस क्रम में गणेश, गौरी, कलश और नवग्रहों का बारी बारी आह्वान करना होगा. इस दौरान अन्य पूजा सामग्री भी भगवान के चरणों में समर्पित करते जाए. अब भगवान के पास तिल के तेल के सात, ग्यारह, इक्कीस अथवा इनसे अधिक दीपक प्रज्वलित करे.
सबसे पहले गणेश जी की पूजा करे, फिर लक्ष्मी माँ और अंत में सरस्वती माँ को पूजा सामग्री चढ़ावे. इसके बाद आप घर के धन और जेवरात को भी भगवान के चरणों में चढ़ा उनकी पूजा कर सकते हैं. अब बारी आती हैं आरती की. आपको पहले गणेशजी और फिर लक्ष्मी माता की आरती कर इस पूजा को समाप्त करना हैं.
42.857142857143