Motivational Technology

कहीं आपकी डिजिटल लाइफ आपकी पर्सनल लाइफ को खोखला तो नहीं कर रही?

एक समय था जब घर के सारे लोग एक साथ बैठ घंटो तक गप्पे मारा करते थे. बच्चे आँगन में खेलते थे. दोस्त आपस में ग्रुप बना कर मोहल्लें में धमाचोकड़ी मचाते थे. कुल मिलाकर रिश्तें नाते एक दुसरे से फिजिकली कनेक्टेड रहते थे. लेकिन जब से स्मार्ट फोंस बाजार में आये हैं और सोशल मीडिया ने लोगो की लाइफ पर कब्ज़ा करना शुरू किया हैं तब से ये रिश्तें और यादगार लम्हें बस डिजिटल लाइफ तक ही सिमित रह गए हैं.

जरा सोचिये आखरी बार ऐसा कब हुआ जब आप ने अपने पुरे परिवार के साथ बैठ कर घंटो बातचीत की हो और इस बीच किसी ने अपने मोबाइल को छुआ भी ना हो या टीवी के रिमोट को हाथ ना लगाया हो?

यही नहीं जहाँ पहले बच्चे हमे घर आँगन में क्रिकेट, सितोलियाँ, पकड़म पकड़ी जैसे खेल खेलते दिखते थे, अब वो मोबाइल में घुस कर घंटो गेम्स खेला करते हैं. पहले बचपन में जब भी हमारा जन्मदिन आता था तो हमे बर्थडे गिफ्ट्स मिलते थे, दोस्त घर आकर या फ़ोन लगा कर विश करते थे लेकिन डिजिटल लाइफ के चलते आज हमे गिफ्ट के नाम पर फेसबुक नोटीफिकेशंस देखने को मिलते हैं और फ़ोन कॉल की जगह व्हाट्सअप मेसेज आ जाते हैं.

पहले जब कोई लड़का किसी लड़की को आई लव यू बोलता था तो वो लम्हा दोनों के लिये काफी स्पेशल होता था. लड़कियों को फूल, गिफ्ट और ग्रीटिंग्स कार्ड जैसी चीजें देकर अपने दिल की बात कही जाती थी. लेकिन आज कुछ बटन्स दबा कर, एक मेसेज को कॉपी पेस्ट कर 17 लड़कियों को आई लव यू का मेसेज चेप दिया जाता हैं.

अगर आपको अभी भी लगता हैं कि आज की ये डिजिटल लाइफ पहले की लाइफस्टाइल से बेहतर हैं तो बस एक काम कीजिए. मात्र एक हफ्ते के लिए अपने सारे सोशल अकाउंट से लॉग-आउट कर दीजिए. अपने स्मार्ट फ़ोन की सारी एप्स, गेम्स, इन्टरनेट सब कुछ बंद कर दीजिये. फिर देखिए फर्क आपको अपने आप ही पता चल जाएगा.

याद रहे हमें इंडिया  को डिजिटल बनाना हैं अपने रिश्तों को नहीं. 

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