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कॉकरोच और वेटर – प्रेरणादायक कहानी

एक बार मैं एक कॉफ़ी शॉप में बैठा, हाथ में प्याला लिए अपनी ज़िन्दगी की परेशानियों के बारे में सोच रहा था. उसी कॉफ़ी शॉप में एक लड़कियों का ग्रुप भी बैठा था. इनमे से एक लड़की अपने बहादुरी भरे कारनामे का एक किस्सा अपने दोस्तों को सुना रही थी.

तभी अचानक कही से एक कॉकरोच आया और उस लड़की के कंधे पर बैठ गया. लड़की ने जैसे ही कॉकरोच को देखा वो अपना आपा खो बैठी और जोर जोर से उछलने और कूदने लगी. इसके बाद उस लड़की ने जैसे तैसे कॉकरोच झटक के अपनी दूसरी दोस्त के ऊपर फैक दिया. अब उस लड़की की बारी थी तमाशा करने की और चीखने चिल्लाने की.

लड़कियों का हंगामा सुन एक वेटर वहां आया. लड़की ने कॉकरोच वेटर के ऊपर फेंक दिया. वेटर शांत रहा और बिना हिले या कुछ बोले कॉकरोच की हरकतों को भापने लगा. फिर उसने फोकस कर कॉकरोच को अपने हाथ से दबोच लिया और बाहर फैंक दिया.

कॉफ़ी पिते हुए मैं ये पूरा नज़ारा देख रहा था तभी मेरे दिमाग में एक बात आई. क्या उन लड़कियों के पैनिक होने और फूहड़ व्यवहार के पीछे वो कॉकरोच जिम्मेदार था? लेकिन फिर वो वेटर शांत क्यों रहा? उसने तो इस परेशानी को बड़े आराम से झेल लिया.

फिर मुझे समझ आया असल परेशानी वो कॉकरोच नहीं था बल्कि उन लड़कियों की परेशानी को ना झेल पाने की असमर्थता (inability) थी.

फिर मुझे एहसास हुआ कि मेरी ज़िन्दगी की असल समस्यां पापा या बोस का जोर जोर से मुझे डांटना, गर्लफ्रेंड से अनबन, करियर में उतार चढ़ाव नहीं हैं बल्कि असल समस्यां तो इन सभी समस्याओं को ना झेल पाने की अमर्थता और इसे लेकर फालतू का ड्रामा करना हैं.

कहानी की शिक्षा: समस्याओं से ज्यादा आपका उन समस्याओं को लेकर जो रिएक्शन होता हैं वो आपको सबसे ज्यादा तकलीफ पहुचाता हैं.

 

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